Pragya Jain Biography in Hindi I IPS प्रज्ञा जैन जीवन परिचय 

[IPS Pragya Jain Biography in Hindi] ना जाने कितनी ही ऐसी महिलाएं हैं जो शादी एवं बच्चे हो जाने के बाद उन्हीं जिम्मेदारियों में उलझ कर रह जाती हैं और वो उससे आगे कुछ करने की सोच भी नहीं पातीं वहीं कुछ महिलाएं इन जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी अपने सपने को हकीकत में बदलने की चाह रखती हैं।

Dr Pragya Jain Biography in Hindi

इसके साथ ही वो उस सपने को पूरा करने की पूरी कोशिश करत हैं और उनमे से कइयों को सफलता भी मिलती है। आज कहानी में हम एक ऐसे ही महिला आईपीएस डॉ० प्रज्ञा जैन (IPS Pragya Jain) के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपने क्लीनिक तथा अपने परिवार एवं यूपीएससी की परीक्षा के दौरान गर्भवती होने के बावजूद भी इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर एक मिशाल कायम किया।

Pragya Jain IPS officer

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के  एक छोटे से कस्बे बड़ौत में जन्मी प्रज्ञा जैन की प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं से हुई है। प्रज्ञा बचपन से ही पढ़ने में काफी होशियार थीं। उन्होंने 10वीं एवं 12वीं कक्षा में अपने जिले पहला स्थान प्राप्त किया था। प्रज्ञा कहती हैं की जब भी किसी को तकलीफ में देखती थी तो उन्हें बहुत बुरा लगता था, इस लिए प्रज्ञा जैन (IPS Pragya Jain) डॉ० बनने का फैसला किया और वे एक आयुर्वेद कि डॉ बन गईं।

IPS Dr Pragya Jain

उनके पिता भी एक आयुर्वेद डॉक्टर थे। इसके बाद उन्होंने बड़ौत में एक क्लीनिक खोली और वहां लोगों की सेवा करने लगी पर इसके बाद उनकी शादी हो गई और वो अब दिल्ली चली गयी, यहां भी उन्होंने क्लीनिक खोली। घर की जिम्मेदारियों के साथ वो क्लीनिक भी संभालतीं थी। इस दौरान उन्हें लगा कि लोगों की मदद करने के लिए यह काफी नहीं है और उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने की ठानी।

Dr. Pragya Jain IPS Biography 2

उनका सपना अब यूपीएससी में सफलता हासिल कर लोगो की सेवा करना बन गया था। प्रज्ञा जैन पूरी जी जान से अपनी तैयारियों में लग गई। परिवार तथा क्लीनिक की जिम्मेदारियों के साथ साथ यूपीएससी की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। प्रज्ञा जैन (IPS Pragya Jain) 6-7 घंटे क्लीनिक में ही रहती इसके बाद जो समय बचता उसमें वो यूपीएससी की पढ़ाई करती।

IPS Dr Pragya Jain Marksheet

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उन्हें जहां भी थोड़ा बहुत समय मिलता उसमें भी वे अपनी तैयारी करती थी। IPS डॉ० प्रज्ञा जैन (Pragya Jain) अपने पहले अटेम्प्ट में साक्षात्कार में चयनित नहीं हो पाई। लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। दूसरे प्रयास में सेहत नहीं ठीक हो पाने के कारण वे प्री लिम्स में भी सफलता पाने से चूक गयी। तीसरे प्रयास में सफलता के अलावा उनके पास कोई और विकल्प  नहीं था क्यूंकि इस बार यदि वो सफल नहीं होती तो उनकी यूपीएससी देने कि उम्र सीमा समाप्त हो जाती।

Pragya Jain Success Story

अपने तीसरे एवं आखिरी प्रयास के दौरान वे गर्भवती भी थीं। इसके बाद भी डॉ० प्रज्ञा जैन (Pragya Jain) हार नहीं मानी उन्होंने पूरी मेहनत से तैयारी की और इसका नतीजा यह हुआ कि उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा ने सफलता हासिल कर 194 वाँ रैंक प्राप्त किया। प्रज्ञा ने अपने दिए गए एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्होंने कभी भी कोई कोचिंग ज्वाइन नहीं किया था उन्होंने खुद से ही UPSC की तैयारी की थी।

Pragya Jain IPS Biography

वो बहुत सारे मौक टेस्ट दिया करती थीं, जिससे उनकी तैयारी अच्छी हो पाए और वो हमेसा मॉक टेस्ट भी परीक्षा जैसे माहौल दिया करती थीं ताकि वे परीक्षा के लिए अभ्यस्थ हो जाएं। उन्होंने कहा कि कोचिंग ज्वाइन करें या ना करें प्रतियोगियों को ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट देने चाहिए, इससे उनकी तैयारी अच्छे से होगी और वे परीक्षा में अच्छा कर पाएंगे।

IPS Pragya Jain

डॉ० प्रज्ञा जैन (IPS Dr. Pragya Jain) एक बेहतरीन उदाहरण हैं उन सभी लड़कियों के लिए जो कुछ करना तो चाहती हैं लेकिन समय के आभाव में नहीं कर पाती यदि वे भी प्रज्ञा की ही तरह अपने सपने के लिए समय निकालें और मेहनत करने को तत्पर तो निश्चित ही वे भी सफलता हासिल कर सकती हैं।

देखिये IPS Doctor Pragya Jain का दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया ये इंटरव्यू!

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Nidhi Siwach Biography in Hindi I निधि सिवाच जीवन परिचय

[Nidhi Siwach Biography in Hindi] बहुत सी ऐसी लड़कियां होती हैं जो अपने परिवार के दबाव में आकर कुछ कर पाने के पहले ही शादी कर लेती हैं, यहां तक कि कुछ लड़कियाँ तो अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पाती और अपने सपने को हकीकत में नहीं बदल पातीं। लेकिन आज कहानी में हम आपको बताएंगे।

Nidhi Siwach Success Story

हरियाणा की एक ऐसी लड़की के बारे में जिसने अपने परिवार द्वारा शादी का दबाव बनाए जाने के बावजूद अपनी मेहनत और लगन से यूपीएससी की परीक्षा में 83वीं रैंक हासिल की। हरियाणा के गुरुग्राम में जन्मी निधि सिवाच (Nidhi Siwach) की शुरुआती पढ़ाई भी यहीं से हुई है। 10वीं कक्षा के बाद वे इंजीनियरिंग करना चाहती थीं।

IAS Nidhi Siwach Story in Hindi

12वीं के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद वे हैदराबाद की एक कंपनी में नौकरी करने लगीं। लेकिन उनका मन वहां ज्यादा दिन नहीं लगा। उनका सपना बचपन से ही वायुसेना में जाने का था, इसीलिए उन्होंने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) की परीक्षा दी।

Nidhi Siwach Biography Family Marksheet and Education details

उन्होंने परीक्षा तो पास कर ली लेकिन साक्षत्कार के दौरान उनका चुनाव नहीं हुआ। इंटरव्यू पैनल के ही एक सदस्य ने उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने की सलाह दी और यहीं से निधि का सपना एक आईएएस अधिकारी बन देश की सेवा करना बन गया। निधि ने जी-जान से परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी, लेकिन उस समय यूपीएससी के प्रीलिम्स में केवल 3 ही महीने बाकी थे।

IAS Nidhi Siwach Biography in Hindi

तब तक निधि सिवाच (Nidhi Siwach) प्रीलिम्स का सिलेबस भी समाप्त नहीं कर पाई थीं। इस कारण वे अपने पहले प्रयास में असफल हो गई। असफलता के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारियों में व्यस्त हो गईं। इस बार भी तैयारी अच्छे तरीके से ना हो पाने के कारण वो सफलता प्राप्त करने से चूक गई। दूसरी बार असफल होने के बाद उनके परिवार वाले उनपर शादी करने का दबाव बनाने लगे।

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Nidhi Siwach Biography

लेकिन निधि सिवाच (Nidhi Siwach) अब यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त करने की ठान चुकी थीं। उन्होंने अपने परिवार वालों को किसी तरह मनाया जिसके बाद उनके परिवार ने उन्हें एक मौका दिया। उन्होंने निधि से कहा कि वे यदि इस बार सफल नहीं हो पाती हैं, तो वे उनकी शादी कर देंगे। लेकिन निधि हताश नहीं हुई इस बार वे दुगुनी मेहनत से तैयारियों में लग गई।

Nidhi Siwach IAS

उनकी मेहनत एवं लगन का परिणाम यह हुआ कि निधि ने इस बार यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल कर 83वीं रैंक के साथ टॉपर्स की सूची में अपनी जगह बनाई। निधि सिवाच (IAS Nidhi Siwach) ने अपने दिए गए एक साक्षात्कार में बताया कि तैयारी के दौरान उन्होंने 6 महीने तक खुद को एक कमरे में बंद रखा था ताकि वे भटकाव से बच सकें।

Nidhi Siwach Life Story 1

इस दौरान उन्होंने अपने परिवारवालों से भी बात नहीं की, साथ ही सोशल मीडिया से भी दूर रहीं। निधि उदाहरण हैं उन सभी लड़कियों के लिए जो अपने परिवार के दबाव में आकर अपने सपने को पूरा नहीं कर पाती। यदि सभी लड़कियां निधि की तरह ही अपने लक्ष्य को पाने की ठान लें तो निश्चित ही वे अपने हर सपने को सच कर सकती हैं।    

देखिये निधि सिवाच (Nidhi Siwach) का दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू!

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Razia Sultan Biography in Hindi I First Muslim Female DSP of Bihar

[Razia Sultan Biography in Hindi] हाल ही में लंबे समय के इंतजार के बाद 64वीं बिहार लोक सेवा आयोग के नतीजे घोषित हुए। जिसमें बिहार को पहली मुस्लिम महिला डीएसपी मिली। गोपालगंज जिले के हथुआ के रतनचक की रहने वाली रजिया सुल्तान ने बिहार की पहली मुस्लिम महिला डीएसपी बनने का गौरव प्राप्त किया।

Razia Sultan First Muslim Women DSP

वर्तमान में (Razia Sultan) बिहार सरकार के बिजली विभाग में सहायक अभियंता के तौर पर कार्यरत हैं। 27 वर्षीय रजिया ने अपने पहले प्रयास में ही अच्छे अंको के साथ बीपीएससी परीक्षा में उत्तीर्ण होकर यह कारनामा कर दिया है। बिहार में जन्मी रजिया की प्रारंभिक पढ़ाई झारखंड के बोकारो से हुई है, जहां उनके पिता मोहम्मद असलम अंसारी बोकारो के स्टील प्लांट में स्टेनोग्राफर के तौर पर कार्यरत थे।

First Woman Muslim DSP of Bihar Razia Sultan

वर्ष 2016 में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। उनकी मां अभी भी बोकारो में ही रहती हैं। (Razia Sultan) ने वर्ष 2009 में दसवीं तथा वर्ष 2011 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। जिसके बाद अपनी आगे की पढ़ाई के लिए वे जोधपुर चलीं गईं। वहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। रजिया अपने 7 भाइ बहनों में सबसे छोटी हैं।

Razia Sultan BPSC Success Story

उनकी पांचों बड़ी बहनों की शादी हो गई है। जबकि उनका भाई एमबीए करने के बाद  झांसी में नौकरी करता है। रजिया ने बताया कि वे बचपन से ही लोक सेवा आयोग में नौकरी करना चाहती थीं और इसके लिए उन्होंने वर्ष 2017 में बिहार सरकार में बिजली विभाग में कार्यरत होने  के बाद भी अपनी तैयारी जारी रखी।

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Razia Sultan 1st female DSP from Muslim community

उसका नतीजा यह हुआ कि (Razia Sultan) वर्ष 2018 में हुए बीपीएससी की प्रिलिम्स में सफलता हासिल कर ली थी। इसके बाद वर्ष 2019 में हुए मेंस में भी उन्हें सफलता प्राप्त हुई और आखिरकार लंबे इंतजार के बाद ने इस वर्ष घोषित हुए नतीजे में उन्हें डीएसपी के पद के लिए चयनित किया गया है। रजिया ने अपने दिए गए एक साक्षात्कार में बताया कि वे प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए काफी उत्सुक हैं। 

Razia Sultan Biography

(Razia Sultan) कहा कि कई बार ऐसा होता है कि लोगों को न्याय नहीं मिल पाता खासकर महिलाओं को। वे कहती हैं कि ज्यादातर ऐसा होता है कि महिलाओं के खिलाफ होनेवाले अपराध की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं हो पाती क्यूंकि महिलाएं अकसर चुप रह जाती हैं, तथा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने भी नहीं आ पाती। (Razia Sultan) कहा कि वे पूरी कोशिश करेंगी कि उनके अधिकार क्षेत्र में ऐसा ना हो तथा सबको न्याय मिले।

Razia Sultan BPSC DSP

मुस्लिम समाज में शिक्षा के अभाव होने के बारे में उन्होंने कहा कि माता-पिता को लड़कियों को पढ़ना चाहिए तथा उनका प्रोत्साहन करना चाहिए। वहीं लड़कियों से उन्होंने अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने सपने को पूरा करना चाहिए। उन्हें लोग रोकेंगे तथा बहुत से कठिनाइयां भी आएंगी लेकिन उन्हें हार नहीं माननी चाहिए।  

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Deshal Dan Ratnu Biography in Hindi I देशलदान रतनू की जीवनी

[Deshal Dan Ratnu Biography in Hindi] जब इरादा हो कुछ कर दिखाने का तो कितनी ही मुश्किलें सामने आयें, इंसान उन सभी बाधाओं को दूर कर अपने सपने को पूरा कर ही लेता है। आज कहानी में हम आपको बताएंगे एक ऐसे ही व्यक्ति देशाल दान रत्नू के बारे में जिन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो पाने के बावजूद भी अपने आईएएस बनने के सपने को साकार किया।  

Deshal Dan Ratnu IAS Biography in Hindi

राजस्थान के जैसलमेर के छोटे से गांव सुमालियाई के रहने वाले देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) के पिता चाय की दुकान चलाते थे। इससे होने वाली आमदनी से वे 7 बच्चों सहित पूरे परिवार का भरण पोषण करते थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण 7 भाई बहनों में केवल देशाल दान और उनके बड़े भाई ही पढ़ पाए थे।

Deshal Dan Ratnu IAS

देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) ने अपनी 10वीं तक की शिक्षा अपने गांव के सरकारी विद्यालय से ही प्राप्त की। इसके बाद वे आईआईटी की तैयारी करने के लिए कोटा चले गए। वे बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे। उन्होंने अपने मेहनत के बल पर जेईई के एंट्रेंस एग्जाम में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी जबलपुर से बीटेक में स्नातक किया।

IAS Deshal Dan Ratnu Biography in Hindi

ग्रेजुएशन करने देशलदान रतनू (IAS Deshal Dan Ratnu) बाद वे आईएएस की तैयारी करने के लिए दिल्ली आ गए। लेकिन उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी कि वो अपनी बेहतर तैयारी के लिए कोई कोचिंग संस्थान में पढ़ सकें। उनके आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के में उनके परिवार ने उनका साथ दिया। उन्होंने उनके अध्ययन सामग्री का सारा खर्च उठाया।

Deshal Dan Ratnu IAS Biography

जब देशाल ने यूपीएससी की तैयारी करनी शुरू की उस दौरान  परीक्षा में काफी कम समय रह गया था। लेकिन उन्होंने दिन रात मेहनत कर पढ़ाई करनी शुरू कर दी और इसका नतीजा यह हुआ कि देशाल ने वर्ष 2017 में केवल 24 वर्ष की उम्र में  UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की इस कठिन परीक्षा में बिना कोचिंग किए ही 82वां स्थान प्राप्त कर टॉपर्स की सूची में अपना स्थान बनाया।

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Deshal Dan Ratnu IAS Topper

देशाल (Deshal Dan Ratnu) कहते हैं की आईएएस बनने की प्रेरणा अपने बड़े भाई से मिली थी वे भारतीय नौसेना में थे। वे जब भी छुट्टियों में घर आते थे उन्हें अपनी नेवी से जुड़ी कहानियां सुनाया करते थे। वे उन्हें भारतीय वायुसेना या एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में जाने को लेकर प्रेरित करते थे।उन्होंने ही देशाल को आईएएस के बारे में बताया था। वर्ष 2010 में उनके भाई आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी में हुई दुर्घटना में शहीद हो गए थे।

Deshal Dan Ratnu Photo

बता दें की उस समय देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) दसवीं कक्षा में थे। वे भी अपने भाई की तरह देश की सेवा करना चाहते थे। देशाल ने अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि जब उन्होंने यूपीएससी में सफलता हासिल की थी तो उस समय उनके पिता को आईएएस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

Deshal Dan Ratnu IAS Story

पर अपने बेटे को मिल रहे सम्मान से वे बेहद खुश थे।देशाल की कहानी से ये साबित होता है कि यदि कोई व्यक्ति मेहनत से अपने लक्ष्य का पीछा करे तो वो उसे निश्चित ही पा सकता है।

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Birendra Kumar Biography in Hindi I बीरेंद्र कुमार की जीवनी

[Birendra Kumar Biography in Hindi] कुछ लोग होते हैं जो सपने तो देखते हैं, लेकिन सपने को साकार करने की राह में आनेवाली कठिनाइयों से बहुत लोग हार मान लेते हैं। पर इन्हीं में कुछ ऐसे भी होते हैं, जो सपने को देखने के साथ ही उसे हर कीमत पर पूरा भी करते हैं। ऐसी ही कहानी है बिहार लोक सेवा आयोग की 64वीं सिविल सेवा संयुक्त परीक्षा में 2232 रैंक हासिल करने वाले बीरेंद्र कुमार की।

Birendra Kumar Success Story

(Birendra Kumar) औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के एक छोटे से गांव हाथिखाप के रहने वाले हैं। बीरेंद्र तीन भाई हैं, उनके पिता भिखारी राम मोची का काम करते थे, वे फेट हुए जूते सिलकर किसी प्रकार अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। वर्ष 2012 में उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। जिसके कारण उनके घर अब कमाने वाला कोई नहीं था, इसीलिए (Birendra Kumar) अपने बड़े भाई जितेंद्र एवं पूरे परिवार के साथ औरंगाबाद आ गए।

Birendra Kumar BPSC Biography in Hindi

यहां आकर उन्होंने करमा रोड में स्थित दलित बस्ती में किराए पर दुकान ली तथा किसी तरह अपना गजरा करने लगे। घर की आर्थिक स्थिति नहीं ठीक हो पाने के कारण बीरेंद्र ने अंडे की एक छोटी-सी दुकान खोल ली थी लेकिन उन्होंने पढ़ाई करनी नहीं छोड़ी। जब भी वे दुकान में वे खाली होते अपनी प्रतियोगिता से जुड़ी पढ़ाई करते होते थे।

Birendra Kumar Biography Hindi me

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कुछ दिनों बाद जब घर की स्थिति कुछ ठीक हुई तब (Birendra Kumar BPSC) बड़े भाई ने एक दुकान खोल ली जिसमें वे बैग तथा चमड़े से बनी अन्य वस्तुएं  बेंचनें लगे। अब उनके घर की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हो चुका था। इसीलिए उनके बड़े भाई ने उन्हें काम छोड़ पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

Birendra Kumar BPSC Biography

इसके बाद बीरेंद्र ने अपने घर के पास में ही रहने वाले एक प्रतियोगी राजीव कुमार के मार्गदर्शन में अपनी पढ़ाई शुरू की। राजीव ने अपनी पढ़ाई दिल्ली से पूरी कि थी। कुछ समय बाद इनका बैच बना तथा सभी प्रतियोगिता की तैयारी करने लगे और इस प्रकार (Birendra Kumar) ने अपनी कड़ी मेहनत से बीपीएससी की प्रतियोगिता में 2232 वीं रैंक प्राप्त कर ली है जिस वजह से उन्हें प्रखंड आपूर्ति अधिकारी का महत्वपूर्ण पद मिला है। 

Birendra Kumar Egg Seller of Bihar who is selected in BPSC

(Birendra Kumar) का सपना अब यूपीएससी में सफलता हासिल करना है तथा वो गरीब बच्चों की सहायता कर उनके लिए सफलता की राह बनाना चाहते हैं। बीरेंद्र की ही तरह यदि सभी अपने सपने को पूरा करने की ठान लें तथा कठिनाइयों का सामना करते हुए भी पूरी मेहनत तथा ईमानदारी से प्रयास करें तो वे भी बेशक अपने सपने को पूरा कर सकते हैं।  

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Nirish Rajput Biography in Hindi I निरीश राजपूत जीवन परिचय

[Nirish Rajput Biography in Hindi] जहां कुछ लोग आर्थिक तंगी के कारण कुछ बड़ा करने की सोचते तक नहीं वहीं उनमे से कुछ ऐसे भी होते हैं, जो इन परेशानियों को भूलकर कुछ कर दिखाने की चाह रखते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको एक ऐसे ही आईएएस अधिकारी की कहानी बताने जा रहे हैं। जिन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए अपनी जी जान लगा दी। मध्य प्रदेश के भिंड जिले के महु गांव में जन्मे निरीश राजपूत एक गरीब परिवार से आते हैं। नीरीश के पिता दर्जी का काम करते थे उससे होने वाली आमदनी से वे किसी प्रकार अपने घर को चलाते थे।

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आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण (IAS Nirish Rajput) ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव के ही सरकारी विद्यालय से प्राप्त की। निरीश बचपन से एक मेधावी छात्र थे। लेकिन उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय होने के कारण उनका आगे पढ़ पाना बेहद मुश्किल था। लेकिन निरीश पढ़ना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने कॉलेज में नामांकन लेने के लिए अखबार बांटने का काम किया और उसी के द्वारा मिले पैसों से निरीश राजपूत ने ग्वालियर के ही एक सरकारी कॉलेज में बीएससी में दाखिला लिया। उसी कॉलेज से उन्होंने एमएससी की पढ़ाई भी पूरी की।

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(Nirish Rajput) सपना आईएएस बनने का था इसीलिए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। तीन भाइयों में छोटे निरीश के दो बड़े भाई संविदा पर शिक्षक बने थे, उन्होंने ने भी निरीश का साथ दिया तथा अपनी नौकरी से मिलने वाले पैसों से वे उनकी पढ़ाई में मदद करते थे। इसी दौरान उनका एक दोस्त जो उत्तराखंड में रहता था, उसने निरीश राजपूत को वहां अपनी सहायता के लिए बुलाया तथा उनसे वादा किया था कि अगर निरीश कोचिंग इंस्टीट्यूट खोलने में उसकी सहायता करेंगे तो वो उन्हें यूपीएससी की अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएगा।

Nirish Rajput Biography

उन्होंने उसकी बात का भरोसा कर कोचिंग संस्थान खुलवाने में उसकी सहायता की तथा 2 साल तक उस संस्था में पढ़ाया भी लेकिन जब उनके दोस्त की कोचिंग इंस्टीट्यूट चल पड़ी और उससे अच्छी खासी कमाई होने लगी तब उनके दोस्त ने (IAS Nirish Rajput) बेइज्जत कर वहां से निकाल दिया। उसने निरीश को यह तक कह दिया कि वे एक गरीब परिवार से आते हैं और उनमें आईएएस अधिकारी बनने की काबिलियत तक नहीं है। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था।

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(Nirish Rajput) ने इस घटना के बाद ठान लिया की वे अपनी पढ़ाई से ही कुछ बड़ा कर सकते हैं तथा खुद के हालात को सुधार सकते हैं। इसलिए वे अपनी यूपीएससी की तैयारी करने के लिए दिल्ली चले गए जहां उनकी मुलाकात अंकित नाम के एक व्यक्ति से हुई जो स्वयं भी यूपीएससी की ही तैयारी कर रहे थे। निरीश उन्हीं के साथ दिल्ली के  मुखर्जी नगर  में किराए के एक छोटे से मकान में रहने लगे। लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय थी कि उनके पास कोचिंग ज्वाइन करने तक के पैसे नहीं थे और नाहीं परीक्षा से जुड़ी अध्ययन सामग्री खरीदने की।

IAS Nirish Rajput Success Story

लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्हें तो बस अब किसी भी तरह बस सफलता हासिल करनी थी, इसीलिए (Nirish Rajput) अपने दोस्त के नोट्स तथा किताबों से पढ़ने लगे। वे प्रत्येक दिन 18 घंटे की पढ़ाई करते थे। निरीश की पहले 3 प्रयासों में उन्हें असफलता हाथ लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी उन्होंने अपनी मेहनत जारी रखी तथा चौथे प्रयास में आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत तथा उनके संघर्ष का फल उन्हें मिल ही गया उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 370वीं रैंक हासिल की।

इस तरह (Nirish Rajput) ने अपने आईएएस बनने के सपने को अपनी कठिन परिश्रम तथा लगन से साकार किया तथा एक आईएएस अधिकारी बन गए। निरीश उदाहरण हैं उन सभी के लिए जो कुछ बड़ा तो करना चाहते हैं लेकिन अपनी आर्थिक स्थिति के के कारण हार मान लेते हैं, यदि सभी इसी तरह सारी कठिनाइयों का सामना करने की हिम्मत करें तो वे भी निश्चित ही अपने सपने को पूरा कर सकते हैं।

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Vishakha Yadav Biography in Hindi I विशाखा यादव जीवन परिचय

(Vishakha Yadav Biography in Hindi) प्रत्येक वर्ष लाखों प्रतियोगी यूपीएससी परीक्षा में भाग लेते हैं। सभी विभिन्न क्षेत्रों से आए होते हैं। यहां तक कि इनमें से ज्यादातर प्रतियोगी अपनी अच्छी खासी नौकरी को भी कुछ अलग करने की चाहत में छोड़ कर आते हैं। लेकिन इन्हीं लाखों में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी लगन तथा आत्म विश्वास के कारण मिशाल बन जाते हैं।

Vishakha Yadav

आईएएस विशाखा यादव की कहानी भी कुछ ऐसे ही है। दिल्ली में जन्मी विशाखा की प्रारंभिक शिक्षा भी वहीं से हुई है। (Vishakha Yadav) बचपन से ही एक मेधावी छात्रा थीं, उन्हें अपने हर क्लास में अच्छे अंक आते थे। बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद विशाखा ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तथा इसके बाद वे एक कंपनी में जॉब करने लगीं।

Vishakha Yadav UPSC Topper

वो अपनी इस नौकरी से संतुष्ट नहीं थीं। इसीलिए विशाखा यादव ने यूपीएससी क्रैक करने की ठानी। ये उनके बचपन का सपना था और उनका परिवार भी चाहता था कि वे सिविल सर्विसेज में आएं लेकिन किन्हीं कारण वश वो ऐसा नहीं कर पाई थीं। पर अब उन्होंने मन बना लिया था, वो अपने इस सपने को साकार करने के लिए परीक्षा की तैयारियों में लग गईं। लेकिन यह सफर उनके लिए आसान नहीं था।

Vishakha Yadav IAS Officer

विशखा यादव अपने दो प्रयासों में प्रीलिम्स में ही सफल नहीं हो पाई। अपने पहले प्रयास में वो 3 अंको से जबकि दूसरे प्रयास में मात्र 1.5 अंको से असफल हो गईं। एक साक्षात्कार में (IAS Vishakha Yadav) ने अपनी असफलता की वजह ज्यादा अध्ययन सामग्री को इकट्ठा कर लेना बताया था, जिसके कारण उनका रिवीजन सही से नहीं हो पाया वहीं उन्होंने यह भी बताया था कि ज्यादा से ज्यादा टेस्ट सीरीज न ज्वाइन कर पाना भी उनकी असफलता का मुख्य कारण बना।

Vishakha Yadav UPSC

(Vishakha Yadav) कहती हैं कि उन्होंने उतने मॉक टेस्ट नहीं ज्वाइन किए जितने उन्हें करने चाहिए थे, जिसके कारण उनका अभ्यास सही ढंग से नहीं हो पाया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि अपनी गलतियों से सीख लेकर उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी जिसके फल स्वरूप अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने 6 ठी रैंक हासिल कर टॉप 10 में अपना स्थान बनाया।

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Vishakha Yadav Biography

एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि  प्रतियोगियों को ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट देनी चाहिए इससे यह पता चल जाता है कि आपकी तैयारी कैसी हुई है। इसके साथ ही कितने अंक लाने पर आप सफल हो सकते है ये भी पता चलता है। उन्होंने  कहा कि सबसे पहले वे प्रश्न हल करने चाहिए जिनका उत्तर अच्छे से पता हो। इसके बाद वैसे प्रश्न हल करने चाहिए जिसमें ज्यादा सोच समझकर उत्तर लिखना पड़े।

Vishakha Yadav Success Story

जबकि वैसे प्रश्नों को सबसे अंत में हल करना चाहिए जिसका उत्तर  नहीं पता हो क्यूंकि ऐसे प्रश्नों में उलझना समय की बर्बादी है। (IAS Vishakha Yadav) कहती हैं कि यूपीएससी प्रतियोगियों को केवल उतनी ही अध्ययन सामग्री अपने पास रखनी चाहिए जितनी उनके लिए जरूरी हो तथा जितना वे पढ़ पाएं। ज्यादा रिसोर्सेज इकट्ठी करने पर अकसर प्रतिभागी दुविधा में पड़ जाते हैं तथा अपनी तैयारी सही तरीके से नहीं कर पाते।

Vishakha Yadav IAS Biography

ऐसा करने पर वे रिवीजन भी अच्छे से नहीं हो पता। उन्होंने प्रतियोगियों को सलाह देते हुए कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफल होने के लिए प्रतिदिन कम से कम  6 से 8 घंटे की पढ़ाई बेहद जरूरी है। तैयारी पूरी होने पर रोज प्रश्नों का हल लिखकर करना चाहिए। इसके साथ ही ज्यादा से ज्यादा मॉक टेस्ट देने चाहिए इससे अपनी गलतियां सुधारकर प्रतियोगी परीक्षा में अच्छे परिणाम ला सकते हैं।

Vishakha Yadav Rank 6

विशाखा का कहना है कि यूपीएससी में सफलता हासिल करना एक लंबे यात्रा की तरह होता है। यदि आप पहले प्रयास में सफल नहीं होते तो हार न माने अपनी तैयारी जारी रखे क्युकी आपकी कड़ी मेहनत का फल आपको जरूर मिलेगा। (Vishakha Yadav) की तरह ही यदि सभी प्रतियोगी अच्छी रणनीति के साथ अपनी गलतियों को सुधारकर अपनी मेहनत जारी रखे तो वे जरूर इस परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। 

इस पोस्ट में हमने आपको (IAS Vishakha Yadav Biography in Hindi) में बताया है। अगर आपको ये पोस्ट पसंद आयी हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर कीजिए।

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Success Story Of IAS Topper Pushplata I UPSC Success Story

[Success Story of IAS Pushplata] जहां एक ओर शादी और बच्चों के बाद महिलाएं अपनी पढ़ाई तथा नौकरी छोड़ देती हैं वहीं पुष्पलता जैसी भी कुछ महिलाएं होती हैं जो किसी भी परिस्थिति में अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करती हैं तथा सफलता भी हासिल करती हैं। आज (IAS Success Story) हम आपको बताएंगे ऐसी ही एक महिला पुष्पलता के बारे में जिन्होंने शादी एवं बच्चे हो जाने के बाद भी आईएएस बनने की ठानी। हरियाणा के रेवाड़ी के एक छोटे से गांव खुशबूरा में जन्मीं पुष्पलता एक साधारण परिवार से आती हैं। 

IAS Pushplata Success Story in Hindi

(IAS Pushplata) ने अपनी  प्रारम्भिक शिक्षा अपने  गांव से थोड़ी दूरी पर स्थित एक गांव प्राप्त की। अपने पढ़ाई के दौरान वे अपने चाचा के घर रहा करती थीं। वर्ष 2006 में उन्होंने बीएससी की पढ़ाई पूरी कर एमबीए किया। इसके बाद वे प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करने लगीं तथा साथ- साथ ही वे सरकारी नौकरी की तैयारी भी करती रहीं। दो साल बाद उन्हें स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद में असिस्टेंट मैनेजर की जॉब मिल गई। वर्ष 2011 में उनकी शादी होने के बाद वो मानसेर चली गईं जहां उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया।

IAS Pushplata Success Story

इस दौरान (Pushplata) एक निजी बैंक में भी कार्यरत थीं लेकिन वे कुछ और करना चाहती थी उनका मन नौकरी में नहीं लग रहा था। वो कुछ बड़ा करना चाहती थीं। इसीलिए उन्होंने वर्ष 2015 में अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया तथा यूपीएससी की तैयारी में लग गईं। उन्हें ये समझ में नहीं आ रहा था कि वो इसकी तैयारी कैसे करें। पिछले 5 सालों तक पढ़ाई न कर पाना भी उनके लिए एक परेशानी थी। उन्होंने अपने दिए गए एक साक्षात्कार में बताया था कि वे जब यूपीएससीएस की तैयारी करने की सोच रही थी।

IAS Pushplata Biography in Hindi

उस दौरान उन्हें आईएएस के अधिकारों तथा एक आईएएस अधिकारी की शक्तियों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। लेकिन (IAS Pushplata) के पति जो एक चिकित्सक थे। उन्होंने उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया। पुष्पलता ने सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफल होने का सपना तो देख लिया लेकिन इसे सच कर पाना इतना भी आसान नहीं रहा। उनके लिए अपने परिवार तथा अपने बच्चे की जिम्मेदारी एवं अपनी पढ़ाई के बीच संतुलन बना पाना कठिन था। लेकिन पुष्पलता ने अपने अपने सपने को पूरा करने की ठान ली थी।

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IAS Pushplata Family and Husband

उन्होंने  जिम्मेदारियों का वहन करते हुए भी अपनी पढ़ाई के लिए समय निकाला और रोज 10 से 12 घंटे की पढ़ाई करनी शुरू कर दी। अपनी तैयारी के लिए (IAS Pushplata) कोचिंग करने दिल्ली भी जाना चाहती थीं लेकिन आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं होने तथा एक बच्चे और परिवार की जिम्मेदारी के कारण वे नहीं जा पाई। इसके बाद वो सेल्फ स्टडी पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए पूरी मेहनत के साथ तैयारियों में लगी रहीं। अपने पहले प्रयास में वे सात अंको के कारण असफल हो गईं इस दौरान उनके परिवार ने भी उनसे कह दिया था कि वे ज्यादा दिनों तक उनका साथ नहीं दे सकते।

IAS Pushplata Biography

पर इन मुश्किलों के बावजूद (Pushplata) ने खुद पर विश्वास बनाए रखा तथा पूरी लगन के साथ अपनी तैयारी में जुटी रहीं और आखिरकार वर्ष 2017 में उन्होंने 80वीं रैंक हासिल कर यह बता दिया कि यदि हमें खुद पर विश्वास हो तो हम अपने सपने को बेशक ही पूरा कर सकते हैं। उन्होंने अपने दिए गए एक साक्षात्कार में कहा था कि हमें परीक्षा पास करने के लिए नहीं बल्कि हमें कुछ हासिल करना है ये सोच के मेहनत करनी चाहिए।

सुनिए [Success Story of IAS Pushplata] उन्हीं की जुबानी

 

पुष्पलता ने यह साबित कर दिया कि परिस्थिति चाहे जो भी हो यदि हम किसी सपने को देखते हैं तो अपनी लगन और मेहनत से उसे पूरा भी कर सकते हैं बस जरूरत है खुद पर विश्वास बनाए रखने की।

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Success Story Of UPSC Topper K Jayaganesh I IAS Success Story

[Success Story of K Jayaganesh] सिनेमाघर के कैंटीन में बिलिंग ऑपरेटर से होटल में वेटर के तौर पर काम करने से लेकर आईएएस बनने तक का सफर तय करने वाले के. जयगणेश ने वह कर दिखाया जो लाखों लोगों का सपना होता है। आज (IAS Success Story) में हम आपको (K Jayaganesh)  की कहानी बता रहे हैं। जयगणेश उदाहरण हैं उन लोगों के लिए जो सही रणनीति तथा उचित दिशा निर्देश ना मिल पाने, आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने तो कभी असफलता से हताश होकर हार मान लेते हैं। के. जयगणेश तमिलनाडु के उत्तरीय अम्बर के पास के एक गांव के छोटे से परिवार से आते हैं।

K Jayaganesh Success Story

उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी तथा उनके पिता घर चलाने के लिए एक फैक्ट्री में सुपरवाइजर का काम करते थे। जहां उन्हें 4500 रुपए वेतन मिलता था। जिससे किसी तरह उनके परिवार का भरण पोषण हो पाता था। (K Jayaganesh) हमेशा से ही अपने घर तथा अपने गांव की गरीबी को दूर करने के बारे में सोचते थे वे गरीबों की मदद करना चाहते थे। अपने चार भाई बहनों में से सबसे बड़े  जयगणेश बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे। उन्होंने अपनी 8वीं तक की शिक्षा अपने गांव के ही विद्यालय से प्राप्त की।

उन्होंने दसवीं कक्षा के बाद एक पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला ले लिया 91% अंको के साथ परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद उन्होंने स्कॉलरशिप हासिल कर पेरियार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। जिसके बाद उन्हें नौकरी  मिल गई जहां उन्हें सिर्फ 2500 रुपए वेतन मिलता था। जयगणेश अपने इस वेतन से संतुष्ट नहीं थे, उन्हें इतने वेतन में अपने परिवार का गुजारा कर पाना मुश्किल लग रहा था।

UPSC logo

वे अपने गांव वालो के लिए भी कुछ करना चाहते थे और उन्हें लगा कि यदि वे कलेक्टर बन जाएं तभी अपने गांव में सुधार का सकते हैं। तब उन्हें आईएएस बनने का ख्याल आया और वे नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी में लग गए। उनके पिता ने भी उनके इस फैसले का समर्थन किया और उन्हें यूपीएससी की तैयारी के लिए पुस्तकें तथा अन्य अध्ययन सामग्री खरीदने हेतु अपनी फैक्ट्री से बोनस के रूप में प्राप्त किए 6,500 रुपए दे दिए जिससे वे तैयारी कर सकें। इसके बाद (K Jayaganesh) तैयारी करने के लिए चेन्नई चले गए।

K Jayaganesh Biography in Hindi

(K Jayaganesh) अपने पहले दो परीक्षाओं में प्रीलिम्स में भी सफल नहीं हो पाए जिसके बारे में उन्होंने बताया कि उन्हें तैयारी कैसे की जानी चाहिए इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं था और उनके मुख्य विषय के रूप में मैकेनिकल इंजीनियरिंग का होना भी एक कठिनाई थी। लेकिन वेल्लोर में उमा सूर्या नाम के एक व्यक्ति थे जो खुद भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे ने उन्हें समाज शास्त्र को मुख्य विषय के रूप में रखने की सलाह दी जो एक आसान विषय माना जाता है। लेकिन वे फिर से उचित दिशा निर्देश न मिल पाने के कारण अपने तृतीय प्रयास में भी असफल रहे।

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UPSC photo 1

(K Jayaganesh) बताते हैं की इसके बाद उन्हें आरए पुरम चेन्नई में स्थित ऑल इंडिया सिविल सर्विस कोचिंग संस्था के बारे में पता चला जो राज्य द्वारा प्रायोजित संस्था थी। उन्होंने उस संस्था में नामांकन हेतु प्रवेश परीक्षा दी तथा उसमें उत्तीर्ण हो गए जिसके बाद उन्होंने उसी संस्था के हॉस्टल में रहकर वहीं से तैयारी शुरू की तथा अपने चौथे प्रयास में प्रीलिम्स में सफलता हासिल की। लेकिन  संस्था के नियमों के अनुसार उन्हें मेंस परीक्षा  के लिए खाने तथा रहने कि सुविधा वहां मुफ्त नहीं थी। कोई नौकरी नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

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अपना खर्च निकालने के लिए उन्होंने सत्यम सिनेमा हॉल के कैंटीन में  बिलिंग ऑपरेटर का काम करना शुरू किया जहां उन्हें 3000 वेतन के रूप में मिलता था। (K Jayaganesh) ने अपनी तैयारी जारी रखी लेकिन इस बार वे इंटरव्यू में असफल हो गए इसका कारण उन्होंने अंग्रेजी पर अपनी कमजोर पकड़ बताई। इन सब के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी में ज्यादा समय देने के लिए उन्होंने ये नौकरी छोड़ एक होटल में वेटर की नौकरी करनी शुरू कर दी।

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वे दिन भर होटल में वेटर का काम करते तथा रात को पूरी लगन तथा मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते। लेकिन वे अपने 5 वें प्रयास में एक बार फिर से प्रीलिम्स में असफल हो गए। इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी कराए जाने वाले एक स्थानीय कोचिंग सेंटर में  समाजशास्त्र पढ़ाना शुरू किया। तथा अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया, पर किस्मत इतनी खराब थी की उन्हें 6वीं प्रयास में  इंटरव्यू में असफलता का सामना करना पड़ा। इसी दौरान उन्होंने इंटेलिजेंस ब्यूरो की परीक्षा भी दी तथा उसमें में वे उत्तीर्ण हो गए लेकिन उनके पास अब प्रश्न ये था कि वे यह नौकरी कर लें या 7 वीं बार फिर आईएएस बनने का प्रयास करें।

K Jayaganesh IAS Life Story, Biography and His Struggle

उन्होंने हार न मानते हुए यूपीएससी की परीक्षा देने का निर्णय किया और उनका ये निर्णय बिल्कुल सही साबित हुआ। आखिरकार 7 वें प्रयास में (K Jayaganesh) को सफलता हाथ लग ही गयी और पुरे भारत में उन्हें 156वीं रैंक हासिल हुई। अपनी लगातार की गई मेहनत और हार न मानने वाले हौसले की बदौलत (K Jayaganesh) ने वह कर दिखाया जो बहुत से लोग करने की सोच भी नहीं सकते। आर्थिक परेशानियों से जूझने तथा लगातार असफलता का सामना करने के बावजूद के. जयगणेश ने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने सपने को पूरा किया और यह साबित कर दिया कि यदि हम अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार कठिन परिश्रम करे तो उसे जरूर पूरा कर सकते हैं।

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Inspiring Journey and Success Story Of IAS Topper C Vanmathi

[Success Story of IAS C Vanmathi] प्रत्येक वर्ष लाखों प्रतियोगी यूपीएससी परीक्षा में सम्मिलित होते हैं लेकिन उनमें से केवल 0.2% ही अपने सपने को साकार करने में सफल हो पाते हैं। इनमें से कई प्रतियोगी ऐसे होते हैं जो सुख-सुविधाओं की कमी के बावजूद अपने कठिन परिश्रम के कारण यूपीएससी में सफलता हासिल करते हैं और यह साबित के देते हैं कि कोई अगर मेहनत और लगन से परिश्रम करे तो निश्चित ही वो अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है। आज हम बात करेंगे ऐसी ही एक आईएएस अधिकारी सी. वनमती की जिन्होंने सुख – सुविधाओं से वंचित होते हुए भी यूपीएससी में सफलता हासिल कर अपने सपने को पूरा किया।

C Vanmathi IAS Success Story in Hindi

(C Vanmathi) का बचपन गरीबी में गुजरा। उनका परिवार केरल के इरोड जिले से आता है, जहां उनके पिता ड्राइवर थे तथा उनका पूरा परिवार पशुपालन करता था। सी. वानमती भी बचपन में पशुओं को चारा दिया करती थीं तथा उन्हें चराया करती थीं। वानमती पढ़ाई में बचपन से ही होशियार थीं। 12 वीं कक्षा के बाद उनके संबंधियों ने उनके परिवार पर उनकी शादी को लेकर दबाव बनाया लेकिन वानमती का सपना आईएएस बनने का था।

C Vanmathi Husband, Biodata and Life Story

(C Vanmathi) को आईएएस बनने की प्रेरणा टीवी सीरियल गंगा यमुना सरस्वती से मिली जिसमें नायिका आईएएस अधिकारी थी तथा उसी दौरान उनके स्कूल में जिला कलेक्टर का दौरा हुआ, जिसके बाद से उन्होंने ठान लिया कि वे आईएएस अधिकारी बन अपने घर की स्थिति बदलेंगी। वनमती ने कंप्यूटर एप्लिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद अपनी परिवार की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए एक प्राइवेट बैंक में जॉब किया तथा साथ ही साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी।

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C Vanmathi Biography in Hindi

उन्हें अपने पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और वर्ष 2015 में अपने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल कर अपने आईएएस अधिकारी बनने के सपने को पूरा किया। इस दौरान इंटरव्यू के दो दिन पहले (C Vanmathi) के पिता की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लेकिन अपने पिता की देखभाल करने के साथ साथ ही उन्होंने इंटरव्यू दिया तथा अपने सपने को पूरा किया। एक इंटरव्यू के दौरान  वनमति ने अपने सफलता का श्रेय अपने पिता को दिया।

C Vanmathi Success Story जिसमें उन्होंने कहा कि जहां उनके आस पास के गांवों में लड़कियों की शादी कम उम्र में ही कर दी जाती थी वहीं उनके पिता ने उन्हें अपने जीवन का निर्णय करने का अधिकार उन्हें स्वयं दिया था जिसके बदौलत ही उन्होंने अपने सपने को पूरा किया। (C Vanmathi) की आईएएस बनने की कहानी उन सभी के लिए एक उदाहरण है जिनका सपना यूपीएससी की परीक्षा में सफल होना है।

[Success Story of IAS C Vanmathi]

(C Vanmathi) ने यह साबित कर दिया कि कोई भी व्यक्ति अपने आईएएस बनने के सपने को पूरा कर सकता है बस उसे जरूरत है कठिन परिश्रम और सही रणनीति की।

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