बिहार में ऑक्सीजन की किल्लत पर पटना HC सख्त, केंद्र को निर्देश- 2 दिन में एक मेडिकल टीम भेजिए

बिहार में ऑक्सीजन की किल्लत पर पटना HC सख्त, केंद्र को निर्देश- 2 दिन में एक मेडिकल टीम भेजिए

बिहार में को विभाजित इलाज की सुविधाओं पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ऑक्सीजन की किल्लत पर विस्तार से जवाब मांगा। साथ ही कहा कि डीएम देखें कि कोई ऑक्सीजन की कालाबाजारी न करे। कोई भी स्टोर साथ ही महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) को निर्देश दिया कि वे दो दिनों के अंदर एक मेडिकल विशेषज्ञों की टीम बिहारॉय, जिसका नेतृत्व उप महानिदेशक करेंगे या शीर्ष स्तर के अधिकारी करेंगे। यह टीम राज्य सरकार की तैयारी और वर्तमान कार्य योजना को आंकेगी और कोर्ट को बताएगी कि कोरोना की बढ़ती अवस्था से निपटने में कोई प्रभावी है? राज्य में किन-किन चीजों की कमी है। बेहतर इलाज के लिए क्या-क्या संसाधनों की आवश्यकता है।

कोर्ट ने मामले पर अगली सुनवाई मंगलवार को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह और न्यायमूर्ति मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ ने मामला पर सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपूर्ति पर पेश कार्ययोजना पर न्यायालय ने अनुकरणोश जाहिर करते हुए पूछा कि एक पक्ष रोजाना ऑक्सीजन की किल्लत के कारण अस्पताल में मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं दूसरी तरफ सरकार भारी भरकम कार्ययोजना विभाग ने समुचित ऑक्सीजन उपलब्धता का उल्लेख किया है। दावा कर रहा है। कोर्ट ने पूछा कि बिहार के लिए तय 194 टन ऑक्सीजन का उठाव क्यों नहीं हो रहा है? इस पर केंद्र और राज्य सरकार के अपने-अपने तर्क पर कोर्ट ने जवाब मांगा है।

इससे पहले राज्य सरकार की ओर से पेश कार्ययोजना में बताया गया कि राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेज में अब ऑक्सीजन की किल्लत नहीं होगी। छह सरकारी मेडिकल अस्पतालों में 300 और 280 एलपीएम का ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट चालू कर दिया गया है। साथ में बाकी के बचे 3 मेडिकल कॉलेजों में प्लांट चालू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जबकि 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 500 से लेकर 1000 एलपीएम क्षमता का ए प्लांट लगाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। वहीं, इन सभी मेडिकल कॉलेजों में 20 केएल क्षमता का नेटवर्किक्स ऑक्सीजन टैंक बैठाने का कार्य प्रक्रियाधीन है। इसे 3 महीने के भीतर चालू किया जा सकेगा। बिहटा के ईएसआईसी राजेंद्र नगर आई सेंटर में इजीआईएमएस में मेदांता अस्पताल और पाटलिपुत्र खेल परिसर में लगभग 1100 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था की जा रही है। कोविड कैर सेंटर के 3455 ऑक्सीजन सिलेंडर से ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। डेडिकेटेड हेल्थ सेंटर को 3986 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है।

डेडिकेटेट कोविड अस्पताल के 1729 बिस्तर पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। राज्य के सरकारी स्वास्थ संस्थानों में 16194 बी टाइप और 7094 डी टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं। जबकि 18806 बी टाइप और 10338 डी टाइप ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया गया है। ये सबके अलावा निजी अस्पताल में 2268 बेडों पर ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है। वर्तमान में राज्य में को विभाजित के लिए 170 एमटी ऑक्सीजन की आवश्कता है। सूबे के विभिन्न अस्पतालों में विभाजित रोगियों के इलाज के लिए 3650 ऑक्सीजन कंसरट्रेटर उपलब्ध है। वहीं, राज्य में पिछले आठ दिनों में 35 टैंकर से लिक्विड ऑक्सीजन से 477 टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई है।

समस्या के लिए ई मेल बनाएँ
परीक्षण के दौरान हाईकोर्ट ने महानमितक को निर्देश दिया कि एक हाईकोर्ट की ई मेल आईडी जेनरेट कर राज्य भर में उसे मीडिया के जरिये प्रचारित किया जाए। जो भी अस्पताल में ऑक्सीजन की किल्लत हुई, वहां से फौरन हाईकोर्ट के ई मेल पर उसकी सूचना दी जाएगी। हाईकोर्ट प्रशासन सूचना देने वाले अस्पताल प्रशासन के संबंधितित जिले के डीएम को फौरन सूचित करेगा। संबंधित डीएम इसका समाधान करेगा।

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