बिहार: बीजेपी (भाजपा) में विधान परिषद कोटे की सीटों को लेकर हलचल शुरू, दिल्ली तक दौड़, फाइनल हो चुके हैं नाम, तापमान ऐलान जल्द

बिहार: बीजेपी (भाजपा) में विधान परिषद कोटे की सीटों को लेकर हलचल शुरू, दिल्ली तक दौड़, फाइनल हो चुके हैं नाम, तापमान ऐलान जल्द

गुरुवार को मकर संक्रांति बीतते ही भाजपा की राजनीतिक आंदोलनों के भी तेज हो गए हैं। भाजपा कोटे की खाली हुई विधान परिषद की दो सीटों के लिए उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम तय कर लिए गए हैं। इसका तापमान ऐलान कभी भी हो सकता है। इसके बाद विधान परिषद की मनोनयन कोटे की सीटों के लिए उम्मीदवार तय होंगे। विधान परिषद की बैठक भर जाने के बाद काल विस्तार के की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

भाजपा नेता विनोद नारायण झा के विधायक बनने और सुशील कुमार मोदी के राज्यसभा सांसद जाने जाने के कारण विधान परिषद की दो सीटों को खाली कर रहे हैं। इन दोनों सीटों पर पार्टी के आलाकमान ने बिहार भाजपा से राय पूछा था। पिछले दिनों ही पार्टी ने अपना प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों के अनुसार दो सीटों में एक सीट सहयोगी दल के खाते में जाएगी।

मुकेश सहनी को मिल में एक सीट मिल सकती है
चर्चाओं की मानें तो समीक्षा प्रमुख और मंत्री मुकेश सहनी को भाजपा अपने कोटे से एक सीट देने जा रही है। मुकेश सहनी को सुशील मोदी वाली सीट दी जाएगी, जिसका कार्यकाल वर्ष 2024 तक बचा हुआ है। दूसरी सीट पर पार्टी विनोद नारायण झा के स्थान पर ब्राह्मण समुदाय के ही एक वरिष्ठ नेता को विधान परिषद में भेजेगी। भाजपा नेताओं के अनुसार मधुबनी जिले में ही पार्टी के जिला अध्यक्ष रहे और इस विधानसभा चुनाव में अंतिम समय में टिकट से वंचित हुए एक वरिष्ठ नेता को ऊपरी सदन भेजने की तैयारी है। हालांकि जब तक ऐलान नहीं हो जाएगा, इस पर संशय कायम रहेगा।

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वहीं, पार्टी नेताओं के अनुसार दो सीटों के बाद पार्टी मनोनयन कोटे में 12 में से अपने हिस्से की 6 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम तय करेगी। इसके लिए वर्तमान में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में है। वैसे पार्टी अपने कोर वेटर वैश्य व ब्राह्मण को सबसे अधिक मौका देगी। चर्चा के अनुसार छह में सबसे अधिक दो वैश्य समुदाय के नेता विधान परिषद जा सकते हैं। इसका मूल कारण यह है कि 74 सीटों में सबसे अधिक वैश्य समुदाय के ही विधायक बने हैं। इसके अलावा ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत समुदाय से भी वरिष्ठ नेताओं को विधान परिषद में जाने का मौका मिल सकता है। वहीं, पिछड़ा समुदाय में कुर्मी-कुशवाहा से एक और एक दलित समुदाय के नेता को विधान परिषद भेजा जा सकता है।

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भाजपा के इतिहास में अब तक किसी यादव को विधान परिषद जाने का मौका नहीं मिला है। मुख्य विपक्षी दल राजद के वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए भाजपा के यादव समाज के कई नेता पटना से लेकर दिल्ली तक इस आधार पर अपनी लॉबिंग कर रहे हैं। देखना होगा कि इसमें व्हाट्सएप सफलता मिलती है। पार्टी के प्रमुख नेताओं की मानें तो विधान परिषद की बैठक भर जाने के बाद ही सुलग का विस्तार होगा। जनवरी के अंतिम सप्ताह में विशेष विस्तार की चर्चा कर रहे हैं। विधान परिषद की सीटों पर नाम तय होने के बाद निककमान की ओर से तय होगा कि सरकार में किन्हें शामिल होने का मौका मिलेगा।

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