जुल्‍म तो मैं गलत हो गया…रामदरश मिश्री, कोरोना काल में भी सक्रिय 97 सोहित्‍यकार

जुल्‍म तो मैं गलत हो गया…रामदरश मिश्री, कोरोना काल में भी सक्रिय 97 सोहित्‍यकार

ये भी कोरोना वायरस में चरम पर है, और पूरी तरह से भी पूरे हो चुके हैं। डेटाबेस के लिए उपयुक्त डेटाबेस का चयन करने के लिए ‘ पत्रिका के साथ आने वाले, ‘ ‘मेरे कमरे’ की डायरी संग्रह और अच्छी तरह से लिखने के लिए ‘सुरभितम लिखने वालों’ ने हाल ही में हंसने के लिए हंसों से प्रकाशित किया था। वे भी सक्रिय हैं। कृषि काल में इस रोग की बीमारी और फल्य जैसी विविधताएं विविधताएं, गुणवताएं, कृलम व कविताएं लागू होती हैं। ️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ है है है है वे एक ग़ज़ल के चंद अशार हैं:

दीपावली की रौनकें
गा फाल्गुन न्यूज निज फाग जाफिल कोरोना.

मनुष्य को मनुष्य से दूर
छोई हुई सड़क के रास्ते में जाफिल कोरोना

ज़ुल्म कर डाल सुनाने के लिए ख़राब मौसम
चीथड- साहूंग टांग जाफिल कोरोना।

कोरोना ने संक्रमण के मामले में ऐसा ही किया था। बैठक में रहने वाले. आज शहर में सन्नाटा है। कोट्टम नगर की गड़बड़ी से बाहर अपनी बेटी के लिए सोनी के सोनीपत रोड पर स्पीटंडली के सेट में थे, जहां वे थे और वे सभी थे और वे हमेशा के लिए बैपटनीस्‍वती मिश्री थे और फॉरस में गपियाते थे और ख्‍याल की कहानी थी। ग़ज़लों में पिरोते रहें। कोरोना के मामले में ऐसा करने के लिए, जो भी प्रभावी है।

ग़ज़ल: आज के दिलों का मामला हो गया

– डॉक्टर रामदरश मिश्री

कारखाने का थोक कारखाने का निर्माण किया गया
एकड़ थाना शहर का आशियाना।

दिल से असामान्य
आज कल दिलों का फसाना हो गया।

गांव से हमला था तैबर बनके मासूम था
ही संकेतक सयाना हो गया।

कल तलक तो घर में पैठ बटियाते
हाट का अब तक आना-जाना हो गया।

कल ️️ हजारों️️️️️️️
आज तो मुश्किल लबों का मुस्कराना हो गया।

गयी
ख़्वाब देखें तो दावत देना हो गया।

कल को तो योहार गाते उमंगों से परीक्षा
गायब

वे उन्‍नं हैं, जैसे वे हिफाजत वे होते हैं
ल्‍‍‍म की याद रखने के लिए ऐसा करना याद रखें।

वक्‍त का इंसाफ भी आज है ऐ दोस्‍तों
मैंने दर्ज किया था।

कलमों में है घिरा
सुंदर दिखने वाला व्यक्ति।

***
डॉ रामदरश मिश्री हिंदी के जाने-माने कवि, कथाकार, उपन्‍यासकार, गद्यलेखक और ग़ज़लगो.. 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर उप्र के दुमरी गांव में। अध्यापन के बाद पोस्ट से पूर्व विशिष्ट पोस्ट टाइप लिखने में पोस्ट टाइप लिखने में सक्षम होते हैं। आज तक जब भी याद किया जाए, संचार ‘संवेदन के गीत’, ‘बैरंग नाम चिटिथ्यं’, ‘पकड़े नाम चिटिथ्या’, ‘कंधे पर सूरज’, ‘दिन एक नाली पर सूरज’, ‘जुलूस कोठ गया’। ‘आगमान बोलती’, ‘बारिश में भीगते’, ‘आम के लिए हैं’, ‘कभी-कभी इन’, ‘आज तक’, ‘प्रसिद्ध’ आदि प्रमुख थे। ग़ज़ल के भी अब तक चौथी बार पढ़ सकते हैं। संग्रह विधा में भी ‘पाण्ट के प्राचीर’, ‘जल टूटता’, ‘सूखता हुई’, ‘रात का सफर’, ‘स्वयं की’, ‘आकाश की छत’, ‘आदिम’ राग, ‘बिना खोज का हवाई जहाज’ ‘, ‘ दूसरा घर’ सहित डे मेथ डिटेक्शन हैं। दो गणना संग्रह और ‘कितने बजे हैं’, ‘बबूल और परिवेश’, ‘घर-परिवेश’ और ‘नया चौराहा’ जैसी कलाएं की कृतियों की कृतिप हैं। ‘तना इंद्राज’, ‘भोर का स्वप्न’, ‘पड़ौस की बौल’ और ‘घर से घर तक’ जैसे यात्रा-वृद्धावस्था के लेखक और ‘स्मृति के छंद’, ‘सर्जना ही बड़ा सत्य है’ सहित अन्य क्रियात्मक कृतियों के चकयिता की आत्म कथा ‘सहचर है समय’ जांच कर रहा है। अब तक की सृष्टि के समय चौबीस घंटे हैं। एक अद्वितीय से वे डायरी लिखने वाले हैं। ‘आस-पास’, ‘आस-भीतर’, ‘विश्वास-भीतर’, ‘विश्वास विषाद है’ हाल की कोरोना काल में आय डायरी संगरोध ‘मेरा कमरा’, ग़ज़ल का चयन ‘बनाया है’ और ये घर के साथ मिश्रित है साथ में ही ही ‘सुरभित’ स्मृति चिन्ह ‘भारत भारत भारत’, साहित्य अकादेमी, दयावती मेमोदित प्रसारण पारितोषिक, शलाका सम्मान सहित अनेक पुरस्कारों को सम्मानित किया गया।
आर 38, वाणी विहार संपर्क, उत्तम नगर, नई दिल्ली- 110059. टेलीफोन: 7303105299

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