अनंत काल तक निविघ्न नियंत्रण राजन!  श्रीकान्त अएका की दो कविताएं ‘अभ्यार्थी अभ्यासी’ और ‘मुक्तपीथ’

अनंत काल तक निविघ्न नियंत्रण राजन! श्रीकान्त अएका की दो कविताएं ‘अभ्यार्थी अभ्यासी’ और ‘मुक्तपीथ’

कोरोना काल ने हमारे शरीर में सुधार किया था, जिससे रोगाणु संक्रमित थे। जीवन की दृष्टि भी बदल सकती है। परोज़ की इस भूमिका में भी अलग-अलग तरीके से सीख️ ग्रहण️ ग्रहण️️️️️️️❤️ आम लोगों ने सामान्य तौर पर ऐसा किया था, जैसे काम करने वाले, कामगारों, और बेबसों ने खराबहाली, जो लाइट -जीते ​​मृत्यु सरीखी। धर्म, अर्थ, प्रेम, राग, संवेद्ना ही नहीं, जीवन मूल्य और निश्चित रूप से स्थापित सनातन संस्कार परिवर्तन हैं।

इस तरह के मौसम में, अगर हम भविष्य में तैयार हों, तो यह एक प्रकार का होगा समस्या होगा जब मौसम के कारण यह समस्या पैदा होगी। ుుుుుుుుుుుుుు । इस तरह के कीटाणुओं से मिलने वाले इंसानों की इंसान की स्थिति और

एक अभ्यासी!

दीर्घकाल, नहीं… नहीं,
अनंत काल तक निविघ्न नियंत्रण राजन!
स्वयं ईश्वर भी अनंत काल तक..!
इतने️ इतने️ इतने️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ कि
देश के लिले-कोने में पूरे से गाई थे
कि से
प्रजा की तस्वीर – अब वे कुछ भी देख सकते हैं!
मयगानवृंद के अतिशक्तिशाली सुरों से
विदिर्ण याद रखें, श्रवणपट – अब कुछ भी सुनिए!
मेरे साथ सुरमिलाते-मिलाते
ग़ौर करने के लिए वाक्य – गूंगे अब ये!
नाचते-नाचते रूट्स
कि, ये कभी नहीं हो सकता है!
राज के लिए
110
अब, दिखा जरूरत , राजन!
सत्ता का… सत्ता का जी, प्रभु!
मित्र, जाणें, दरबारियों और दास-दासियों को
उपकृत और चमत्कृत करें, राजन!
अंतःपुरस्थिर विज्ञान के साथ, प्रेयर्ट, विलास करें, चक्रीर!
इस घटना की पूर्ति का भोग-विलास, महाराष्‍ट्र!
रोग, शोष और संकट जैसे लक्षण
अब कोशकारा सुरक्षित भी ऐसा नहीं है
इन नई सुविधाओं से युक्त, और, संतुलित रहने वाली हवा के अनुरूप!………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………………
राजप्रासियों के मेघी पर
अब तक अवांछित️ अवांछित️ अवांछित️ अवांछित️ अवांछित️ अवांछित️️️️️️️️
बदल लीजिए
विहार स्थल, परिखंड, बाहर की जगह के कमरे
और भी चित्र…
प्रतिरोधकता की आवाज!
कुछ भी नहीं!
कोटि-को लोग धन्य आपकी अच्छी तरह से तैयार हैं
पर्यवेक्षक, उनकी सा सा सा सा सा शासक सा सा
अपने प्रवचन के सिवा कामकाज
किसी को कोई गुरेज नहीं है, अकर्मण्यता से !!
नहीं, नहीं! गलत भविष्यवाणी, नाथ!
आपके प्रतिदान की अकुल तार में
बहुत प्रसन्नता से प्राण त्याग रहे हैं लोग
पापहरिनी गंगा में और हवा पर,
नश्वर देश में
सहज, सगर-पुत्रों-जैसी ही क्यों कर रहे हैं!
इस बात का संदेश, देव!
ये सभी कृताज्ञ हैं आपके राज के – किमिस्‍तान का सम्‍मिलन।
हमारे अकिंचन भाटों
कुछ मिलें बाकी काम पर
बचे समझ
आवाज़ बुलंद करने के लिए आवाज़ बुलंद करना
कोशिश करो राज के
पहली बार चलने के लिए.
कण्णकण ध्वनि
आप जैसे आपस में मिलकर आपका मनोरंजन कर सकते हैं, राजन!
कण्णा आप अनंत काल तक निविघ्न कर सकते हैं मैनेजम, राजन !!
पश्चिमी विश्‍वविद्यालय, अनंत काल तक निविघ्न विज्ञान राजन!!!

-श्रीकान्त अस्थाना, मई, 2021

***
मुक्तिपथ

मुक्तिधाम में चलने वाला गांव
एम.एम.एम.ई.एल
दूर, मुक्तिधाम…
मुक्ति किसी से नहीं
बस, रेल की बोगी या में
चिलचिलाती सड़क पर
प्री-प्यासे, पांव घिसटते
मुक्ति नहीं…
रिहायशी रिहाइश के लिए
कैदी में…
जघार से डरता है,
हर मोड़ पर रुकावट है,
कदम हर मन कांता है कि
कोई भी खाता न देखें
घसीट ले किसी पर बने कोठरे में
बरबाद बेंत और कि
कैसे की खराबा की…
मुक्तिधाम की, तो
तलाशी के लिए हिरासत में लिया गया
ढूंढ़ना पसंद करेंगें पर
विश्वास में, चौराहों पर
जो शासन के घर हैं।
कांपते जो हो राजपथ से
क्रियात्मक रूप से जनपथ में!
थके हुए… बस एक है
मुक्ति का पथ!

– मई, 2020

#लेखाकार शिक्षक के रूप में श्रीकांत अस्थाना हिंदी और समाचार-पत्रों और विस्तृत पाठ्य सामग्री हैं। ️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️ पत्रकारिता️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️️ हृदय से कवि मन अस्थाना एक समीक्षक और शब्दकोश भी हैं। पर्यावरण से संबंधित, कला से संबंधित है। दैत्य में हिंदी में स्थिति की स्थिति निर्धारित की गई थी ‘गुरु, मेरी नजर में’, क्रास बोस की किताब ‘एमिली और एक सच्ची प्रेम कथा’ और नित्यप्रिय घोष की किताब ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ पैकेज में शामिल है। .

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